दोस्तो, मेरा नाम आकाश है. मैं दिल्ली का रहने वाला हूँ.मैं एक इंजीनियर हूँ और मेरा खुद का बिजनेस है जिसके कारण मैं भारत में लगभग हर जगह घूमता रहता हूँ.यह घटना आज से आठ साल पहले की है.मेरी जिंदगी की यह एक सच्ची और बहुत प्यारी घटना है
हुआ कुछ इस तरह कि हमारे घर के पीछे वाली गली में एक भाभी रहती थीं, जो दिखने में बहुत ज्यादा सुंदर थीं.उनका नाम शालिनी था.उनकी हाइट लगभग 5 फुट 6 इंच थी, भरा हुआ शरीर, गोरा रंग और लंबे बाल. वे भाभी मुझे बहुत पसंद थीं.जब मैं अपनी छत पर होता और वे मुझे उनकी छत पर दिखाई दे जातीं, तो समय कब निकल जाता, पता ही नहीं चलता था.उस वक्त भाभी की उम्र 35 साल थी और मेरी 28 साल.भाभी के दो बेटे थे.मेरी भाभी से कभी बात नहीं हुई थी, न ही उन्होंने कभी बात करने की कोशिश की थी.लेकिन फिर कुछ ऐसा हुआ कि भाभी हमारे पड़ोस के मकान में रहने आ गईं.जब भाभी पड़ोस में आईं तो पता चला कि वे बहुत कड़क मिजाज वाली लेकिन हंसमुख स्वभाव की थीं.पड़ोस में रहने के कारण अब कभी-कभी उनसे बात होने लगी.थोड़ा बहुत हंसी-मजाक भी होने लगा.लेकिन न तो मैंने कभी कोई इशारा किया और न ही भाभी की तरफ से कोई इशारा आया.सब कुछ सामान्य चल रहा था.मेरी शादी को दो साल ही हुए थे लेकिन मेरी बीवी की बिना बात झगड़ने की आदत से मैं परेशान हो चुका था.एक दिन भाभी का बड़ा बेटा बोला- अंकल, आपका वाई-फाई हमारे यहां आता है, आप पासवर्ड बता दीजिए प्लीज!मैंने कहा- मुझे याद नहीं है.अगले दिन जब मैं ऑफिस से घर पहुंचा तो मम्मी ने कहा- शालिनी को मार्केट से कुछ सामान लाना है, तुम उसके साथ चले जाओ और दिला लाओ.यह सुनकर मुझे बहुत खुशी हुई.मैं भाभी को अपनी गाड़ी से मार्केट ले गया.वहां सब कुछ सामान्य रहा.वापस आते वक्त मैंने भाभी से कहा- आपका बड़ा बेटा वाई-फाई का पासवर्ड मांग रहा था. मैंने नहीं दिया, कहीं वह इंटरनेट पर Www Xxx उलटी-सीधी चीजें न देख ले!भाभी बोलीं- नहीं … वह बहुत मासूम है! वह सिर्फ कार्टून देखता है.हम दोनों के बीच थोड़ा हंसी-मजाक हुआ, फिर हम घर पहुंच गए.भाभी ने बताया कि उनके पति साल में 6 से 8 महीने हैदराबाद रहते थे. इसी वजह से उन्हें कभी बाजार से सामान लाने आदि में दिक्कत होती है.मैंने कहा- अरे आप बेहिचक मुझसे कह दिया करो. मैं आपको बाजार ले जाया करूंगा.यह बात हुई तो उन्होंने मुझसे खुद कहा- आप मुझे अपना नंबर दे दीजिए. मैं आपको फोन कर लिया करूंगी.इस तरह से गाड़ी में ही हमने एक दूसरे के नंबर ले लिए.रात में मैंने भाभी को व्हाट्सएप पर ‘हाय’ भी भेज दिया और तुरंत ही उनका जवाब भी आ गया.उस दिन के बाद से हमारी मोबाइल पर बातें शुरू हो गईं.एक दिन बातों-बातों में मैंने उन्हें सॉरी बोला.उन्होंने पूछा- सॉरी क्यों बोल रहे हो?मैंने कहा- उस दिन गाड़ी में मैंने आपसे इस तरह बात की, इसलिए सॉरी!उन्होंने कहा- कोई बात नहीं!फिर मैंने कहा- आपका मन नहीं लगता होगा भैया के बिना?उन्होंने उदास स्वर में जवाब दिया- मन का क्या है, उसे तो लगाना पड़ता है.मैंने पूछा- दिन तो काम में निकल जाता होगा, लेकिन रात कैसे काटती हो?उन्होंने कहा- बस इंटरनेट पर वीडियो या मूवीज देखकर!यह सुनकर मैंने हिम्मत जुटाई और उनसे पूछा- क्या हम दोस्त बन सकते हैं?उनके जवाब ने मुझे चौंका दिया- हां, हम दोस्त बन सकते हैं!मैंने मजाक में कहा- क्या मैं अपनी इस दोस्त को एक फ्रेंडली हग दे सकता हूँ?उन्होंने हँसते हुए कहा- हां, कर सकते हो … फ्रेंडली हग करने में क्या बुराई है!मैंने कहा- देख लो, अपनी बात से मुकर मत जाना!उन्होंने जवाब दिया- नहीं, नहीं मुकरूँगी! तुम कर लेना फ्रेंडली हग!इसके बाद हमने एक-दूसरे को गुड नाइट कहा और फोन पर बात खत्म हो गई.दोस्तो, सच बताऊं तो भाभी से ये बात करते हुए मेरी इतनी ज्यादा फट रही थी कि कहीं वह गुस्सा न हो जाएं.क्योंकि भाभी हंसमुख होने के साथ-साथ बहुत गुस्से वाली भी थीं!अगले दिन सुबह बच्चों के स्कूल जाने के बाद मैं भाभी के घर चला गया.भाभी ऊपर वाले फ्लोर पर कपड़े धो रही थीं.मैं ऊपर गया, तो उन्होंने पूछा- क्या हुआ? कैसे आना हुआ?मैंने कहा- रात में आपसे कुछ बात हुई थी न!वे बोलीं- मुझे लगा तुम मजाक कर रहे थे!मैंने कहा- मैंने कोई मजाक नहीं किया. आप अपना प्रॉमिस पूरा करो.यह कहकर मैं भाभी को रूम में आने को कहकर रूम में चला गया.भाभी रूम में आईं और मुझसे थोड़ी दूरी पर खड़ी हो गईं.मैंने उनके पास हाथ बढ़ाया और उन्हें अपनी तरफ खींचा.भाभी के हाथ कांपने लगे और वे ‘नहीं, नहीं!’ कहने लगीं.मैंने उन्हें अपनी तरफ खींचा और अपने सीने से लगा लिया.भाभी बोलीं- छोड़ो यह गलत है!लेकिन शायद भैया के इतने महीनों से दूर रहने के कारण वे अपनी भावनाओं पर काबू नहीं कर पा रही थीं.फिर मैंने धीरे से उनके कान पर एक किस किया.भाभी ने मुझे बहुत टाइट अपनी बांहों में जकड़ लिया.
एक तरफ वे मुझे अपने सीने से चिपकाती जा रही थीं और मुँह से कह रही थीं- ये सब गलत है … जाओ यहां से!फिर मैंने उनके होंठों पर अपने होंठ रख दिए.कई महीनों से प्यासी भाभी मेरे होंठों को अच्छे से चूसने लगीं.हम दोनों एक-दूसरे में पूरी तरह खो गए थे.एक लंबी किस के बाद जब हम अलग हुए तो भाभी अपनी आंखें नहीं उठा पा रही थीं.फिर हम एक-दूसरे के ऐसे गले लग गए, जैसे कभी अलग होना ही न चाहते हों.इसके बाद हमने फिर से किस किया.मेरा एक हाथ भाभी के बूब्स पर चला गया और मैं दूध दबाने लगा.मैंने भाभी का हाथ पकड़ा और अपनी पैंट के ऊपर से अपने लंड पर रख दिया.भाभी ने अपना हाथ हटा लिया.लेकिन मैंने फिर से उनका हाथ वहां रखवाया.इस बार भाभी ने मेरा लंड पैंट के ऊपर से पकड़ लिया और दबाने लगीं.मैंने भाभी को घुटनों पर बैठने का इशारा किया और पूछा- क्या आप भैया का मुँह से करती हो?उन्होंने नजरें नीचे करके हां में सिर हिलाया.फिर मैंने अपनी पैंट की चेन खोलकर लंड बाहर निकाला और उनके मुँह के सामने कर दिया.भाभी ने मेरी आंखों में देखा और धीरे से लंड पर किस करते हुए उसे मुँह में लेकर चूसने लगीं.दोस्तो, मैं आपको बता नहीं सकता कि उस वक्त मैं कितना अच्छा महसूस कर रहा था.जिंदगी में पहली बार किसी ने मेरा लंड चूसा था.करीब 15 मिनट तक लंड चूसने के बाद मैंने भाभी को खड़ा किया और उनका कमीज ऊपर करके उनके बूब्स चूसने लगा.तब भाभी बोलीं- अब जाओ! अगर कोई आ गया तो प्रॉब्लम हो जाएगी!मैंने भाभी से वादा लिया कि उनके घर पुनः मिलेंगे और मैं अपने घर आ गया.अगले दिन मैंने भाभी को व्हाट्सैप पर हाय लिखा. उनका तुरंत रिप्लाय आ गया.मैंने कहा- आ सकता हूँ!वे बोलीं- हां.मैं झट से उनके घर आ गया और घर में दाखिल होते ही मैंने दरवाजे की कुंडी लगा दी.भाभी मेरे सीने से चिपक गईं.मैं उन्हें अपनी गोदी में उठा कर उनके बेडरूम में ले गया.उधर हम दोनों बेतहाशा एक दूसरे से चिपक कर चूमाचाटी करने लगे.कब हम दोनों के कपड़े अलग हो गए, कुछ अहसास ही नहीं हुआ.भाभी की बॉडी सच में किसी कमसिन लड़की के जैसी थी.वे मुझे अपने दूध चुसवाने लगीं और आह आह करके सिसकारती जा रही थीं- आह चूस लो मेरी जान … आह आज बहुत दिनों से प्यासी अपनी शालिनी को चोद दो आकाश आह!मैंने जल्दी से उनकी चुत का रुख किया और टांगों को फैला कर चुत पर जीभ लगा दी.वे मेरी जीभ के हमले को झेल ही नहीं पाईं और झड़ गईं.मैं उनकी चुत में अपनी जीभ को लगाए हुए चाटता रहा.भाभी की चुत एक बार फिर से गर्म हो गई और वे मेरे सर को अपनी टांगों में दबा कर मुझे चुत से रगड़ने लगीं.कुछ देर बाद मैंने चुत से सर हटाते हुए कहा- अब आज आपको असली मजा मिलने वाला है!वे मुस्कुरा रही थीं.मैंने लंड का सुपारा भाभी की चुत से टिकाया और हल्का सा दाब दे दिया.मेरा मोटा लंड भाभी की रस टपकाती चुत के छेद में घुसता चला गया और भाभी की हल्की सी दर्द भरी आह निकल गई.मैंने लंड को पेलना जारी रखा और कुछ ही समय में पूरा लंड भाभी की चुत में पेवस्त हो गया था.वे मुझे इशारे से अपने ऊपर आने के लिए कहने लगीं.मैं उनके ऊपर लेट सा गया और उनके होंठ चूसने लगा.भाभी मस्ती से मेरे होंठ चूस रही थीं और मैं उनकी एक चूची को मसलता हुआ लंड की ठोकर से चुत की खुजली मिटा रहा था.कुछ ही समय बाद मैंने ताबड़तोड़ झटके देने आरंभ कर दिए और भाभी की मदभरी आवाजें मुझे जोश दिलाने लगीं.करीब बीस मिनट की तेज चुदाई के बाद मैं झड़ने को हुआ तो भाभी ने वीर्य बाहर छोड़ने को कहा.मैंने लंड चुत से खींचा और उनकी चूचियों पर गिरा दिया.भाभी हंस रही थीं.वे मेरी चुदाई से बेहद संतुष्ट थीं और शायद दुबारा के लिए उनकी आंखों में मस्ती दिख रही थी.हम दोनों उठे और बाथरूम में आ गए.उधर भाभी ने फव्वारा चला दिया और हम दोनों नंगे नहाने लगे.
उसी दौरान भाभी ने मेरे लंड को चूस कर फिर से खड़ा कर दिया और मैंने उन्हें बाथरूम में ही घोड़ी बना कर पेलना चालू कर दिया.
वे मस्ती से चुत चुदवा रही थीं और कामुक आवाजें निकाल रही थीं.
काफी देर तक चुत चोदने के बाद मैं लंड बाहर निकाल कर खड़ा हो गया और भाभी ने लौड़े को चूस कर उसका माल पी लिया.
वे अब मेरे लौड़े की परमानेंट जुगाड़ हो गई थीं.
दोस्तो, इससे आगे की सेक्स कहानी में सुनाऊंगा कि भाभी ने मेरे साथ क्या क्या किया.
आशा करता हूँ कि आप को मेरी सेक्स कहानी पसंद आई होगी.