मेरा नाम अरमान है. मैं बेंगलुरु में रहता हूँ और मैं एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर हूँ.
मेरा रंग सांवला जरूर है लेकिन मेरे चेहरे पर एक आकर्षण है जो कि किसी भी लड़की या भाभी को एक बार में ही मोहित कर लेता है.
इसके अलावा लड़कियों या भाभियों के लिए सबसे जरूरी बात एक मस्त लंड होता है, जो के मेरे पास है.
मेरे लंड का साइज साढ़े छह इंच का है और ये इतना मोटा है कि किसी भी लड़की या भाभी को न केवल सैटिस्फाइड कर सकता है बल्कि कुछ तो मेरे लौड़े से चुदवा कर रो देती हैं.
दोस्तो, ये मेरी पहली चुदाई की सच्ची सेक्स कहानी है.
मैं कोई लेखक नहीं हूँ, इसलिए कोई गलती हो जाए, तो प्लीज माफ करना.
चलिए तो शुरू करते हैं मेरी और श्वेता मैम की सेक्स कहानी.
जब मैं गया तो वह मुझे रूम में ले गई और वहां मुझे अकेले पढ़ाने लगी.
मुझे ऐसा लग रहा था कि ये रूम आज ही साफ किया गया हो और अभी इधर कोई आता नहीं है.
मैंने पूछा- मैम इधर क्यों बुलाया?
वह बोली- ये अभी नया है, ज्यादा यूज़ नहीं होता है और अभी मेरे घर वाले भी इधर नहीं आते हैं. इधर हम लोग शांति से पढ़ सकते हैं.
मैंने सोचा कि जब इधर कोई नहीं आता है तो मैम को इधर आराम से चोदा भी जा सकता है.
शायद मैम को भी मेरे साथ सेक्स करने का मूड बनने लगा था इसलिए वह भी मेरे साथ हंसी मजाक करने लगी थी.
शनिवार को कम दोनों पढ़ाई खत्म करके जाने लगे तो उसने मुझे अगले दिन यानि संडे को भी आने का कहा.
जब मैंने उससे समय का पूछा तो वह बोली कि दोपहर में 3 बजे आना.
उस टाइम पर सभी के घरों में अमूमन सब लोग सो जाते हैं.
मैं अगले दिन तीन बजे उसी कमरे में पहुंचा तो दस्तक दी.
मैम ने आकर दरवाजा खोला, तो मैंने देखा कि वह गीले कपड़ों में हैं.
वह बोली- तुम बैठो, मैं बस जरा कपड़ा धोकर आती हूँ.
मैं बैठ गया.
कुछ पांच मिनट बाद वह अपने उन्हीं गीले कपड़ों में मुझे पढ़ाने आ गई.
आज मैम की टी-शर्ट एकदम गीली थी और अन्दर उसने ब्रा नहीं पहनी थी तो उसके सॉफ्ट-सॉफ्ट 34 साइज के बूब्स मस्त लग रहे थे और निप्पल एकदम टाइट दिख रहे थे.
जब मैंने नीचे देखा, तो उसकी लैगिंग भी गीली थी और शायद पैंटी भी नहीं थी तो उसकी चूत का आकार व दरार साफ दिख रही थी.
उस दिन मैं जींस पहन कर गया था, उसे इस तरह से देख कर मेरा लंड खड़ा हो गया.
चुस्त जींस में मेरा लवड़ा दर्द करने लगा तो मैं लंड सैट करने की कोशिश कर रहा था लेकिन सैट नहीं हो पा रहा था.
मैम समझ गई और वह कुछ समझाने के बहाने मेरे पास सरक आई.
उसने मेरी जांघ पर कॉपी रखी और मेरे कड़क लंड को छूती हुई मुझे पढ़ाने लगी.
पहली बार ऐसा हो रहा था, मुझसे कंट्रोल नहीं हो रहा था.
मैं मैम से बोला- मैम, मुझे वॉशरूम जाना है.
उसने स्माइल की और मुझे वॉशरूम में ले गई.
मैं अन्दर गया, उधर 2 पैंटी और ब्रा हुक पर टंगी थीं.
मैंने एक पैंटी ली और उसमें लंड दबा कर रगड़ने लगा.
जल्दी जल्दी लंड हिलाया और अपना सारा रस उसमें लगा कर झड़ गया.
मैंने वीर्य उसकी पैंटी में लगा रहने दिया और सू-सू कर के वापस आ गया.
मैं 5 मिनट बाद आया तो मैम स्माइल कर रही थी.
वह समझ गई थी कि मैं लंड हिला कर आया हूँ.
उस दिन उसने मुझे बड़ा गर्म किया मगर मैं भी हरामी था तो मैंने भी उससे कुछ नहीं कहा … क्योंकि चिड़िया तो खुद दाना चुनने के लिए मरी जा रही थी तो जल्दबाजी क्या करना.
अब अगले वीकेंड पर भी मुझे उसी नई वाली क्लास में जाना था तो मैंने इस बार ढीला वाला ट्राउजर पहना जिसमें से लंड साफ दिखे.
जब मैं गया तो आज भी वह कपड़े धो रही थी.
उसी दिन के जैसे भीगे कपड़ों में वह मेरे पास आकर मुझे पढ़ाने लगी.
अपनी दो उंगलियों में पकड़ कर मींज रहा था.
वह लौड़े को सहलाती और मसलती हुई तड़पने लगी … मदभरी सिसकारियां लेने लगी.
अब मैंने उसे सोफ़े पर बिठाया और उसकी दोनों टांगों को फैला कर खुद नीचे बैठ गया.
फिर मैं धीरे-धीरे उसकी छोटी छोटी झांटों वाली पिंक चूत पर अपनी नाक को रगड़ने लगा, होंठों से चुत की फाँकों को चूमने लगा.
वह मेरे बालों को पकड़ कर आह आह कर रही थी.
सच में क्या मस्त चूत थी, एकदम दूध सी गोरी और फाँकें खोल कर अन्दर का नजारा एकदम पिंक.
मैंने अपनी जीभ से उसकी चुत को चाटना स्टार्ट कर दिया.
मैं आज पहली बार किसी की चूत चाट रहा था.
मुझे बेहद लजीज लग रही थी.
उसकी चुत की खुशबू इतनी मदहोश कर रही थी कि मेरा तो मन कर रहा था कि साली की बुर को खा ही जाऊं.
कुछ मिनट चूसने के बाद वह भी झड़ गई.
उसकी चुत से निकला मैं सारा पानी पी गया.
उसके नमकीन अमृत का स्वाद मस्त था … इसलिए मैं चुत को चाटता ही रहा.
इससे वह वापस से गर्मा गई.
अब उससे कंट्रोल नहीं हो रहा था, वह बोलने लगी- अब अपना लंड अन्दर डाल दो, मुझसे कंट्रोल नहीं हो रहा है!
मैंने जानबूझ कर देर लगाई और खड़े होकर उससे वापस से अपना लंड चुसवाया.
जब मेरा लंड एकदम हार्ड हो गया, तो मैंने उसे जमीन पर लिटाया और मिशनरी पोजीशन में उसकी चुत में लंड डालने लगा.
दोस्तो, मेरे लौड़े का टोपा इतना मोटा है कि आसानी से किसी चुत में घुसता ही नहीं है.
वही हुआ, इसकी चुत में भी मेरे लंड का सुपारा नहीं जा रहा था.
फिर मैंने जोर लगा कर धक्का मारा तो आधा लंड अन्दर चला गया.
मैम की बुर फट गई और उसकी आंखों से आंसू निकल आए.
हालांकि मुझे तो उसके लंड चूसने के अंदाज से पहले ही पता चल गया था कि यह किसी बड़े लौड़े से चुदी हुई रांड है.
इसलिए मैंने बिना किसी संकोच के कुछ और झटके मारे तो मेरा पूरा लंड अन्दर चला गया.
वह दर्द से बेहोश होने लगी लेकिन मैं लगा रहा.
कुछ देर बाद वह लंड से सहज हो गई और अपनी गांड उठाती हुई चिल्लाने लगी- आह मजा आ रहा है … और जोर से चोद मादरचोद … आह मुझे और जोर से चोद बहन के लौड़े!
अब वह एक्साइटमेंट में गाली देने लगी थी.
मैंने भी उसके दूध पकड़ कर मसले और गाली देना शुरू कर दी- चुद ले कुतिया साली … मेरे लंड से आह!
‘आह भैन चोद जोर जोर से चोद ना … आज पूरी संतुष्ट कर दे मुझे … आज तक मैं 3 लंड ले चुकी हूँ लेकिन किसी के लौड़े से इतना मजा नहीं आया, जितना तेरे लौड़े से चुदवाने में आ रहा है … आह.’
मैं- रुक जा रंडी साली छिनाल … आज मैं तेरी चूत फाड़ दूंगा!
मैं लंड पेलता रहा.
उसके लंड चूसने से मेरा हथियार एक बार झड़ चुका था, इस वजह से मैं लंबा चल रहा था.
मैम- साले, कितना बड़ा लंड है तेरा … इतना दम होता है कटे लंड में … ओओह यस फक मी हार्डर!
मैं- हां मेरी रंडी … आज तो तुझे पूरी दम से चोदूंगा … साली तू सही से चल नहीं पाएगी!
मैम- साले मेरी पैंटी में लंड हिला कर चला गया था, पैंटी को साफ तो करेगा न!
मैं- हां करूंगा बेबी, पहले तुझे पेल तो लूं!
फिर 6-7 मिनट बाद मेरा निकलने को था तो मैंने पोजीशन बदल कर उसे डॉगी बना दिया और पीछे से पेलने लगा.
क्या मस्त गांड थी उसकी … चप-चप की आवाज गूंजने लगी.
चुदाई करते हुए कुछ ही देर में मैम की गांड लाल हो चुकी थी.
करीब 10 मिनट बाद वह वापस से झड़ गई और उसके झड़ने के बाद मैंने भी कुछ झटके मारे तो मेरा भी निकलने वाला हो गया था.
मैंने पूछा- कहां निकालूं?
वह बोली- रुको, मुझे चूसना है.
वह लंड निकाल कर बैठ गई और मेरे लंड को मुँह में लेकर चूसने लगी.
कुछ ही मिनट बाद मेरे लौड़े से निकला सारा वीर्य खा गई.