दोस्तो, मेरा नाम दिवेश है, मेरी उम्र 23 साल है और मैं नोएडा का रहने वाला हूँ.
आप सभी को मेरा प्यार भरा नमस्कार.
आज मैं आप सभी के सामने अपने जीवन की पहली और एकदम सत्य घटना प्रस्तुत करने जा रहा हूँ.
यह सेक्स कहानी मेरे और एक नर्स के बीच की है, जिससे मेरी मुलाक़ात तब हुई जब मैं हॉस्पिटल में एडमिट था.
यह बात अभी से कुछ महीने पहले जनवरी की उस वक्त की है जब बाइक से गिरने के कारण मेरा एक छोटा सा एक्सीडेंट हो गया था.
इस घटना के तुरंत बाद मुझे हॉस्पिटल ले जाया गया जहां मुझे पता चला कि मेरे दाएं हाथ में फ्रैक्चर है और मेरे पैर में भी थोड़ी सी चोट आई है.
इसके चलते मुझे कुछ दिन हॉस्पिटल में रहने की सलाह दी गई.
मुझे वहां एक प्राइवेट कमरा दिया गया था.
हॉस्पिटल में मेरी मुलाक़ात एक नर्स, इस कहानी की नायिका यानि श्रेया (25 साल) से हुई.
जब मैंने उसे पहली बार देखा तो मैं उससे देखता ही रह गया.
श्रेया की बड़ी बड़ी आंखें, लम्बे काले बाल, मस्त गदराया हुआ 32-28-36 का कातिलाना फिगर देख कर ही आह निकल गई.
उसे देख कर मेरा मन किया कि अभी इसे अपनी तरफ खींच कर चूम लूं … पर ये उचित नहीं था और संभव भी नहीं था.
डॉक्टर मुझे बता रहे थे कि मुझे किन बातों का ध्यान रखना है, पर मेरा पूरा ध्यान बस श्रेया पर था.
वह यह बात समझ रही थी और मंद मंद मुस्कुरा रही थी.
अंत में डॉक्टर ने मुझसे कहा- यह श्रेया है और यही आपका यहां पर ध्यान रखेगी.
डॉक्टर के जाने के बाद, मेरी श्रेया से पहली बार बात हुई.
उसने मुझे हाय किया लेकिन मैं उसे अभी भी एकटक देख कर मुस्कुरा रहा था.
वह हंसी और बोली- सर, बस भी कीजिये कितना देखेंगे!
यह सुनकर मुझे होश आया और तब मैंने उसे अपना परिचय दिया.
इसी दौरान उसने बताया कि उसकी ड्यूटी रात को लगती है और अगर मुझे किसी भी चीज़ की जरूरत हो तो मैं उसे बुला सकता हूँ.
इस दुर्घटना में मेरे दाएं हाथ में अक्सर दर्द रहने लगा था और मुझे हर छोटे काम के लिए श्रेया को बुलाना पड़ता था.
वह मेरे खान-पान और दवाई का पूर्ण रूप से ख्याल रखती थी.
इस सबकी वजह से अब मुझे उससे धीरे धीरे लगाव होने लगा था.
रात को अस्पताल में ज्यादा लोग नहीं होते थे, मेरे फ्लोर पर श्रेया को मिलाकर बस एक और नर्स होती थी.
देखते ही देखते मुझे अब अस्पताल में 7 दिन हो चुके थे और इसी के साथ मेरी और श्रेया की गहरी दोस्ती भी हो गई थी.
हम दोनों एक दूसरे से हर तरह की बात करते और साथ ही मैं उसकी बहुत तारीफ करता, जिससे वह शर्मा जाती और धीरे से मुझे मुक्का मार कर अपनेपन का इजहार करती.
एक दिन की बात है, दूसरी नर्स छुट्टी पर थी और आज बस श्रेया की ड्यूटी लगी थी.
मैंने उससे कहा- अरे तुम मुझे अच्छी लगती हो, मैं तो हमेशा सच बोलता हूँ. तुम हो ही इतनी सुंदर कि मेरा दिल पिघल जाता है.
श्रेया- अच्छा जी, सिर्फ तुम्हें लगती हूँ शायद. आजतक तो किसी ने नहीं बोला ऐसा!
मैं- क्यों? तुम्हारे बॉयफ्रेंड ने कभी तुम्हारी तारीफ नहीं की?
श्रेया- ओ हैलो मिस्टर मरीज, मेरा कोई बॉयफ्रेंड नहीं है!
मैं- ऐसा हो ही नहीं सकता. तुम इतनी सुन्दर हो, हॉट हो, तुम्हारा पक्का बॉयफ्रेंड होगा.
श्रेया- नहीं यार, पढ़ाई के बाद मेरी नौकरी लग गई और अब यहां काम कर रही हूँ. बॉयफ्रेंड बनाने का कभी वक़्त ही नहीं मिला. तुम बताओ, तुम्हारी तो गर्लफ्रेंड होगी ना?
यह कहते हुए उसके चेहरे पर एक ऐसा सा भाव था, जिसका उत्तर यदि हां में होता तो वह निराशा का भाव कहलाता.
मैं- नहीं, मेरी भी कोई गर्लफ्रेंड नहीं है. कोई मिली नहीं आज तक!
यह सुनते ही उसका चेहरा दमकने लगा था.
फिर उसका हाथ पकड़ कर मैंने कहा- पर अब शायद मिल गई है.
वह मुस्कुराई और शर्माती हुई यह बोलकर चली गई- मुझे कुछ काम है.
इस सबके बाद मुझे जोश आ गया और मेरा 7 इंच लंबा लंड पूरे तनाव में आ गया.
मेरा मुठ मारने का मन करने लगा और मैं अपने बाएं हाथ से मुठ मारने लगा.
मुझे इससे बड़ी मुश्किल हो रही थी क्यूंकि मैं ये सब काम अपने दूसरे हाथ से करता हूँ.
फिर भी मैं पूरे जोश में अपनी आंखें बंद करके अपना लंड सहलाता रहा.
मैं ये कर ही रहा था कि तभी मुझे किसी के खांसने की आवाज़ आई.
मैंने आंखें खोल कर देखा तो सामने श्रेया खड़ी थी और मुझे देख कर हंस रही थी.
मैंने तुरंत अपना लंड अन्दर डाला और शर्म से लाल हो गया.
श्रेया हंसती हुई बोली- अरे, रुक क्यों गए? शर्मा गए क्या? अभी तो इतना फ़्लर्ट कर रहे थे … अब क्या हो गया?
मैं- सॉरी मुझे माफ़ कर दो, मुझे पता ही नहीं चला कि तुम कब अन्दर आ गईं!
श्रेया- अरे कोई बात नहीं, होता है … पर ये तो बताओ, मूड कैसे बना तुम्हारा? किसके बारे में सोच रहे थे?
वह लगातार हंसती रही.
मैं- मैं तुम्हारे बारे में सोच रहा था.
श्रेया- बहुत तेज हो तुम तो … चलो करो, मुझे देखना है!
मैं- नहीं कर पाऊंगा, बाएं हाथ से तकलीफ हो रही है.
श्रेया- कोई नहीं, मैं हूँ ना!
तभी उसने मेरे खड़े लंड को कपड़ों के ऊपर से पकड़ लिया और उसे सहलाने लगी.
मेरी तो ‘आह’ निकल गई.
यह पहली बार था, जब किसी लड़की ने मेरा लंड पकड़ा था.
उसने देखते ही देखते मेरा लंड बाहर निकाल लिया और बोली- यह तो बहुत बड़ा है और मोटा भी, मैंने ज़िन्दगी में पहली बार लंड छुआ है.
उसने जब यह कहा कि पहली बार उसने किसी का लंड छुआ तो मुझे एक अजीब सी शांति मिली.
ऐसा लगा कि बस श्रेया ही वह लड़की है, जो मेरी जीवनसंगिनी बनने लायक है.
फिर उसने मेरा लंड ज़ोर से हिलाना शुरू किया और मुझे शरारत से देखती रही.
मैंने भी अपने हाथ से उसके बूब्स पकडे और दबाने लगा.
उसकी भी ‘आह’ निकल रही थी.
उसकी चूत से भी पानी रिसता हुआ उसके कपड़ों के ऊपर से नज़र आ रहा था.
उसने मेरे लंड पर अपना थूक डाला और अच्छे से हिलाने लगी.
श्रेया- और मज़ा चाहिए?
मैं- हां.
उसने अपना मुँह खोला और मेरे लंड को अपने मुँह में भरकर उसे ऊपर से नीचे तक अपनी जीभ से चाटने लगी.
सच कहूँ दोस्तो, इतना मज़ा मुझे आज तक कभी नहीं आया था.
वह मेरा लंड चूसती रही और उसके मुँह से ‘गूंह गूंह’ जैसी आवाज़ निकलती रही.
थोड़ी देर बाद मैं अपने चरम पर पहुंच गया और बोला- मेरा निकलने वाला है.
श्रेया ने लंड को मुँह से बाहर निकाला और मुझे देखती हुई बोली- मेरे मुँह में ही निकाल देना, मुझे जानना है कि इसका स्वाद कैसा होता है?
यह कहती हुई उसने वापस लौड़े को मुँह में भर लिया.
एक मिनट बाद मैंने ज़ोर से आह भरी और सारा माल श्रेया के मुँह में डाल दिया.
उसे थोड़ी तकलीफ हुई लेकिन उसने एक भी बूंद ज़ाया नहीं जाने दी और सारा माल गटक गई.
हम दोनों की आंखें मिलीं और मैंने उसे बहुत प्यार से देखा.
मैंने उसे ऊपर खींचा और एक गहरी किस किया.
किस करते दौरान, हमारी जीभ आपस में टकरा रही थीं और हम दोनों बस किस करते रहे.
फिर मैंने उससे कहा- अब मुझे सेवा का एक मौका दो.
श्रेया- बिल्कुल मेरी जान … पर मुझे एक चक्कर मारकर आने दो.
वह आस-पास का मुआयना करने चली गई.
थोड़ी देर बाद वह वापस आई और मुझे आंख मारती हुई बोली- रास्ता साफ़ है बेबी.
वह मेरे ऊपर चढ़ गई और मुझे किस करने लगी. उसने इस बात का ध्यान रखा कि मेरे हाथ पर ज्यादा दबाव न पड़े.
मैंने उसे बेड पर लेटने को कहा और खुद नीचे खड़ा हो गया.
मैंने उसकी टी-शर्ट के ऊपर से ही उसकी चूचियों को चूमा.
तभी किसी की आवाज़ आई, जो श्रेया को कॉरिडोर में बुला रहा था.
श्रेया जल्दी से उठी और अपने कपड़े ठीक करके बाहर चली गई.
मुझे उस आदमी पर बहुत गुस्सा आया.
खड़े लंड पर पानी मार गया साला.
कुछ देर बाद श्रेया वापस आई और बिना कुछ कहे मेरे साथ मेरे बिस्तर में लेट गई.
मैंने उसे चूमा और प्यार से देखने लगा.
वह बोली- मुझे तुमसे प्यार हो गया है!
मैंने कहा- हां श्रेया जान, मुझे भी. क्या तुम मेरे साथ शादी करोगी!
वह खिल उठी और बोली- हां जरूर … पर मुझे अभी तुम्हारे बारे में ज्यादा कुछ नहीं मालूम है!
उसे मैंने अपने बारे में सब कुछ बताया.
उस रात हम दोनों ने एक दूसरे को खूब प्यार किया और उसने मुझे अपने दूध चुसवा कर मजा भी दिया.
मेरा मन उसकी चुत चूसने का था पर मेरी स्थिति कुछ ऐसी थी कि चुत चूसना संभव भी नहीं हो पा रहा था.
करीब दस दिन बाद जब मुझे अस्पताल से छुट्टी मिली और उसके लगभग एक महीने बाद जब मैं पूरी तरह से स्वस्थ हो गया, तब श्रेया मुझसे मिलने आई.
इस बीच हम दोनों लगातार फोन पर संपर्क में बने रहे.
अब तक मेरे परिवार से मेरा भाई भी आकर जा चुका था.
चूंकि आजकल सब अपने अपने काम में व्यस्त रहते हैं, तो वह भी एक दिन रुक कर चला गया था.
मेरे परिवार में मेरा भाई ही है, जो अपनी पत्नी और बच्चों के साथ दूसरे शहर में रहता है.
मैंने उसे श्रेया से भी मिलवाया और बताया कि मैं श्रेया को पसंद करता हूँ और इससे शादी करना चाहता हूँ.
उसने भी हामी भर दी थी.
दो महीने बाद श्रेया अपनी मम्मी को लेकर मुझसे मिलने आई.
मैंने उसे सब कुछ बताया कि मेरे परिवार में सिर्फ मेरा भाई है और मैं हूँ.
श्रेया की मम्मी ने भी बताया कि श्रेया उनकी इकलौती लड़की है और कुछ दूर के रिश्तेदार हैं.
जल्द ही हम दोनों की शादी हो गई.
हम दोनों ने कोर्ट मैरिज की थी.
मेरे कुछ दोस्त और भाई आए थे.
श्रेया की मम्मी और कुछ फ्रेंड्स के अलावा दूर के एक रिश्तेदार भी आए थे.
उसकी ज्यादातर रिश्तेदारी कोलकाता में थी, तो लोग दिल्ली नहीं आए थे.
शादी के बाद हम दोनों ने अपनी गोल्डन नाइट एक फाइवस्टार होटल में मनाने का तय किया.
उस रात श्रेया मेरी बांहों में आई और हम दोनों ने बहुत प्यार से एक दूसरे के साथ अपनी जिंदगी की शुरुआत की.
श्रेया ने बताया कि उसे पहली बार में ही मैं पसंद आ गया था.
मैंने भी ईश्वर को शुक्रिया किया कि मेरे एक्सीडेंट ने मुझे मेरी बीवी दिला दी.
उस रात हम दोनों ने 69 में आकर एक दूसरे को चूसने का सुख दिया.
मैंने उससे यह पूछना उचित नहीं समझा कि क्या वह सच में पहली बार किसी मर्द के साथ सहवास कर रही है … क्योंकि उसने मेरे लंड को पकड़ कर कहा था कि वह पहली बार किसी का लंड पकड़ रही है.
हमारा रिश्ता भरोसे पर ही परवान चढ़ रहा था.
श्रेया ने भी नहीं पूछा कि क्या मैं उसके जीवन में पहली लड़की हूँ.
फिर जब हम दोनों ने चुदाई शुरू की तो वह एक कुंवारी लड़की निकली थी, यह जानना मेरे लिए बहुत बड़ी खुशी की बात थी.
शादी और सुहागरात के बाद हम लोग एक ही साथ रहने लगे थे. उसकी मम्मी मेरी मम्मी बन गई थीं.
दोस्तो, सेक्स कहानी में चुदाई की डिटेल लिखने से बच रहा हूँ क्योंकि श्रेया अब मेरी बीवी है.
कृपया मुझे मेल के ज़रिये ज़रूर बताएं कि आपको ये लव स्टोरी कैसी लगी.