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भाभी को ट्रेन में चोदा Train sex story hindi

भाभी को ट्रेन में चोदा Train sex story hindi

नमस्ते दोस्तो! आज मैं आपको बताता हूँ कि कैसे मैंने स्टेशन में मिली एक भाभी के साथ समय बिताया।

मेरा नाम निखिल मान है, मेरी उम्र 30 साल है और मैं हरियाणा के रोहतक का रहने वाला हूँ।
मेरी हाइट 5 फुट 9 इंच है। मैं दिखने में न ज्यादा मोटा हूँ, न पतला… बस औसत हूँ।

मैं पंजाब (जालंधर) में नौकरी करता हूँ।
मुझे औरतों के साथ समय बिताना और कामुकता भरी कहानियाँ पढ़ना बहुत पसंद है।

आज मैं अपनी पहली कहानी लेकर आया हूँ जिसमें मैंने ट्रेन में मिली एक भाभी के साथ शारीरिक संबंध बनाए।
यह सच्ची घटना अभी कुछ महीने पहले की है।

दोस्तो, अब आपको और बोर न करते हुए सीधा कहानी पर आता हूँ।

एक दिन जैसे ही मैं सुबह ऑफिस गया तो ऑफिस HR ने मुझसे कहा कि आपको ऑफिस के काम से दिल्ली जाना पड़ेगा। दुबई से कोई पार्टी आ रही है, उनसे मीटिंग करनी है!

मैंने ट्रेन की बुकिंग करने की कोशिश की.
लेकिन मुझे किसी भी ट्रेन में कोई सीट नहीं मिली।
तो मैंने जनरल डिब्बे में जाने की सोची।

मेरी ट्रेन रात को 10 बजे की थी तो मैं ऑफिस से आने के बाद अपना बैग पैक किया और खाना खाकर स्टेशन पे 9 बजे ही पहुँच गया।

मैं स्टेशन पे घूमने लग गया।
वहाँ मैंने एक भाभी को देखा, वो भी उसी ट्रेन का इंतज़ार कर रही थी।

उनकी बनावट बहुत ही आकर्षक थी, जिसे देख कर किसी का भी मन मचल जाए।
मैं उनके पास गया और जैसे-तैसे मैंने उनसे बात करनी शुरू की।
तब उन्होंने बताया कि उनकी टिकट कंफर्म नहीं हुई है और उनका जाना भी ज़रूरी है।

उन्होंने बताया कि उनके पापा की तबीयत ठीक नहीं है और वो अपने मायके जा रही थीं।

फिर धीरे-धीरे हम इधर-उधर की बातें करने लग गए।

काफी देर तक बात करने के बाद मैंने उनका नाम पूछा, तो उन्होंने अपना नाम जसप्रीत कौर बताया।
वो जालंधर में ही रहती हैं।

देखने में उनकी उम्र 35-36 साल की लग रही थी और उनका फिगर एकदम कातिल था! उनका फिगर लगभग 34-30-36 का था।
उनका रंग बिल्कुल दूध की तरह सफेद था।

देखने में वो बिल्कुल एक “पंजाबी पटोला” लग रही थीं।
मैंने मन ही मन में सोचा कि अगर आज इनका साथ मिल जाए, तो रात का सफर मस्त कट जाए!

फिर हमारी ट्रेन के आने की घोषणा हुई।
वो अपना एक बैग लेकर मेरे पीछे आकर खड़ी हुईं।

मैंने उन्हें कहा- आप आगे जाएँ, ट्रेन में बहुत भीड़ होगी तो जल्दी-जल्दी चढ़ना पड़ेगा।
मैं मन ही मन में सोच रहा था कि कुछ भी हो, आज इन्हें छोड़ूँगा नहीं!

जैसे ही ट्रेन स्टेशन पे आई, बहुत भीड़ थी।
जैसे ही हम ट्रेन में चढ़ने लगे तो अंदर वाली सवारियों ने हमें बाहर की तरफ धकेलना शुरू किया।

भाभी मेरे आगे थीं।
जैसे ही भाभी पीछे हुईं, तो उनकी देह मुझसे टकरा गई।

भीड़ का पूरा फायदा उठाते हुए मैंने अपना हाथ उनकी कमर पे फेर दिया।
उनके अहसास से मेरी उत्तेजना और बढ़ गई।

जैसे-तैसे करके हम दोनों ट्रेन में चढ़ गए!
काफी देर तक हम दोनों ऐसे ही खड़े रहे और एक-दूसरे से बात करते रहे।

मुझे डर भी लग रहा था कि कहीं मैं कोई हरकत करूँ और भाभी हल्ला न कर दें।

जैसे ही अगला स्टेशन आने को हुआ और पैसेंजर उतरने के लिए आगे आने शुरू हुए तो मैंने मौके का फायदा उठाया और उन्हें स्पर्श किया।

इस पर उन्होंने कोई विरोध नहीं किया.
तो मेरी हिम्मत और बढ़ गई।

जैसे ही स्टेशन पे ट्रेन रुकी, पैसेंजर उतरे और हमें बैठने की जगह मिल गई।
हम दोनों एक-दूसरे से सट कर बैठ गए।

मैं मोबाइल में लीड लगा के गाने सुनने का नाटक करने लग गया।
वो बोर होने लग गईं.
फिर भाभी ने मुझसे कहा, “मुझे भी एक लीड शेयर कर लो!”
मैंने एक लीड उनको दे दी।

कुछ देर बाद उनको नींद आने लग गई तो वो मेरे कंधे पे सिर रख के सोने लग गईं।
मेरी तो नींद ही उड़ी हुई थी।

रात के 1:30 बज चुके थे और सवारियाँ लगभग सो चुकी थीं।
मैंने हिम्मत करके उन्हें सहलाना शुरू किया।

शायद वो नींद में थीं.
तो उन्होंने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी जिससे मेरा हौसला और बढ़ गया।

मैंने धीरे से उन्हें दबाया, जिससे उनकी आँख खुल गई और वो मेरी तरफ देखने लग गईं।
मुझे थोड़ा डर लगा।

फिर उन्होंने मुझसे कहा, “आप सोए नहीं!”
मैंने उनसे कहा, “आप जैसी इतनी खूबसूरत भाभी मेरे पास बैठी हों, तो भला किसे नींद आएगी!”
यह सुनकर वो हँसने लग गईं।

अभी रात के 3 बजने वाले थे और सभी गहरी नींद में थे।
मैंने भाभी की टांग के ऊपर अपना हाथ रख दिया।
वो भी समझ गई थीं कि मैं क्या चाहता हूँ।

फिर वो मुझसे बोलीं, “ये गलत है जो आप कर रहे हो। मैं शादीशुदा हूँ और मेरी एक लड़की भी है!”

लेकिन मेरे ऊपर तो वासना पूरी चरम सीमा पे थी।
मुझे उनकी कोई बात सुनाई नहीं दे रही थी।

उन्होंने एक खुला शर्ट और नीचे इलास्टिक वाली पजामी पहन रखी थी।

मैंने अपना हाथ और ऊपर ले जाने की कोशिश की तो उन्होंने मेरा हाथ पकड़ लिया।
मैंने उनसे कहा, “जो पकड़ना है उसे तो पकड़ती नहीं हो!”

मेरे इतना कहने पे उन्होंने मेरी उत्तेजना की ओर देखा, जो साफ झलक रही थी।
उसे देख कर वो हँसने लगीं।

अब मेरा रास्ता बिल्कुल क्लियर था।
मैंने उनकी पजामी में हाथ डाल दिया।
उन्होंने नीचे कुछ नहीं पहना हुआ था।

मैंने उनसे पूछा, “आपने पैंटी नहीं पहनी?”
उन्होंने धीरे से कहा, “मैं रात को ब्रा-पैंटी नहीं पहनती!”

फिर उन्होंने मेरे कान में कहा, “कोई देख लेगा!”
लेकिन मैंने अपना हाथ नहीं हटाया।

उनकी त्वचा एकदम रेशमी और चिकनी थी।
मैंने उनसे कहा, “आप तो एकदम साफ और चिकनी हैं!”
उन्होंने बोला, “कल ही वैक्स करवाई थी और आज अचानक जाना पड़ गया!”

मेरे मन में तो लड्डू फूटने लग गए।
अब वो भी गरम होने लग गई थीं।

मैंने उनका हाथ पकड़ कर अपने ऊपर रख दिया।
वो मुझे सहलाने लग गईं।

उन्होंने मुझसे कहा, “आपका तो बहुत ही प्रभावशाली है! मेरे पति का तो इससे आधा ही है!”

अब मुझसे रहा नहीं जा रहा था, तो मैंने उनसे कहा कि आगे स्टेशन आने वाला है तो हम AC डिब्बे में चलते हैं।
वो भी एकदम तैयार थीं।

जैसे ही स्टेशन आया, हम दोनों जनरल डिब्बे से उतर कर 2nd AC वाले डिब्बे में चले गए।

मैंने सोच लिया था कि टीटी (TT) आएगा तो उसे बोल देंगे कि ट्रेन चल पड़ी थी तो हम इस डिब्बे में जल्दी से चढ़ गए।
लेकिन टीटी के आने से पहले ही ट्रेन चल पड़ी।

मैंने देखा कि कोई हमें देख तो नहीं रहा है।
AC डिब्बा बंद था।

मैंने भाभी को बोला कि आप पहले बाथरूम में जाओ।
वो जैसे ही बाथरूम में गईं, मैंने दोनों तरफ देख कर जल्दी से बाथरूम में प्रवेश किया और अंदर जाते ही लॉक कर दिया।

फिर शुरू हुआ असली खेल! मैंने उनको ज़ोर से अपनी बाहों में भर लिया और उनके होंठों को चूमने लगा।
मैं उन्हें बुरी तरह सहलाने लगा।

वो भी मेरा पूरा साथ देने लगीं।
मैंने उनकी पजामी नीचे की और उन्हें प्यार करने लगा।

फिर उन्होंने कहा, “जल्दी करो! अब मुझसे कंट्रोल नहीं हो रहा!”

मैंने भी देर न करते हुए अपना पजामा नीचे किया और उन्हें प्यार करने को कहा।
वो तुरंत तैयार हो गईं।
मैंने उन्हें अपनी पकड़ में लिया और गहराई तक उतर गया।

करीब 10 मिनट तक यह सिलसिला चला।
जब मैंने उन्हें खड़ा किया, तो वो बोलीं, “इतनी ज़ोर से पकड़ लिया कि मेरी जान ही निकाल दी!”

अब मेरा मन उन्हें और भी करीब से महसूस करने का था।
मैंने उनसे कहा, “अपनी टाँगें चौड़ी कर लो!”

मैं उन्हें जी भरकर महसूस करने लगा।
वो एकदम गरम हो चुकी थीं।
उन्होंने मुझसे कहा, “जल्दी करो! अब रहा नहीं जा रहा, अगर कोई आ गया तो मुश्किल हो जाएगी!”

मैंने समय की गंभीरता को समझा।
मैंने उन्हें पीठ के बल झुका के ‘घोड़ी’ बनने को बोला।
वो जल्दी से उसी पोजीशन में आ गईं।

मैंने अपने पर्स से कंडोम निकाला और पहन लिया।
मैं एक कंडोम हमेशा अपने पर्स में रखता हूँ क्योंकि “चूत और भूत का कोई पता नहीं कहाँ मिल जाएँ!”

फिर मैंने कोशिश की, लेकिन नमी की वजह से फिसलन ज्यादा थी।
मैंने उनसे कहा, “अपने हाथों से सहारा दो!”

उन्होंने वैसा ही किया।
मैंने एक हाथ से उनकी कमर पकड़ी और पूरी ताकत से धक्का मारा।
मेरा लंड आधा अंदर चला गया।
वो छटपटाने लग गईं और चिल्लाईं.
लेकिन उनकी आवाज़ ट्रेन के शोर में दब गई।

वो बोलीं, “निकाल लो! बहुत दर्द हो रहा है!”
लेकिन मैंने उसे बाहर नहीं निकाला।
मुझे पता था कि अगर एक बार बाहर निकाल लिया तो फिर मौका नहीं मिलेगा।

थोड़ी देर बाद जब दर्द कम हुआ, तो मैंने एक और धक्का मारा जिससे मैं पूरा समा गया।
अब उनसे दर्द बर्दाश्त नहीं हो रहा था और वो रोने लग गईं, “निकाल लो! बर्दाश्त नहीं हो रहा!”

मैं कुछ देर वैसे ही रुका रहा।
थोड़ी देर बाद वो नॉर्मल होने लग गईं और खुद को हिलाने लगीं।
मैं समझ गया था कि अब दर्द की जगह उन्हें मज़ा आने लगा है।
मैंने धीरे-धीरे गति बढ़ानी शुरू की।
कुछ देर बाद उनका दर्द खत्म हो गया और वो ज़ोर-ज़ोर से साथ देने लगीं।

करीब 15 मिनट तक यह खेल चलता रहा।
फिर उनकी देह ढीली पड़ गई.

लेकिन मेरा काम अभी बाकी था।
मैंने और ज़ोर से प्रहार शुरू किए।

जब मेरा समय आने वाला था, तो मैंने उनसे पूछा, “मेरा होने वाला है, कहाँ निकालूँ?”
उन्होंने कहा, “मेरे अंदर ही निकाल दो!”

मैंने उनकी कमर को ज़ोर से पकड़ा और अपना सारा वेग उनके अंदर उड़ेल दिया।
कुछ देर मैं वैसे ही रहा।
फिर ट्रेन चुदाई करने के बाद हम दोनों ने अपने कपड़े ठीक किए और एक-दूसरे को किस किया।

उन्होंने मुझे कहा, “ऐसी संतुष्टि आज मुझे पहली बार मिली है! पहले कभी ऐसा नहीं हुआ!”

फिर उन्होंने मेरा नंबर लिया।
जब मैंने उनसे उनका नंबर माँगा, तो उन्होंने मना कर दिया और कहा कि वो खुद फोन करेंगी और दोबारा मिलने का वादा किया।

मैंने उनसे मज़ाक में कहा, “अगली बार मुझे तुम्हारी पीछे से मारनी है!”
तो वो हँसने लगीं और बोलीं, “आगे का तो बाजा बजा दिया, अब पीछे पे भी नज़र टिका के बैठे हो!”

मैंने कहा, “आपकी बनावट है ही कुछ ऐसी कि किसी का भी दिल मचल जाए!”

ट्रेन दिल्ली पहुँचने वाली थी।
हम कुछ देर बाथरूम में ही रहे।

फिर मैंने पहले बाहर निकल कर देखा और उन्हें बाहर आने को बोला।

दिल्ली आते ही हमने एक-दूसरे को गले लगाया।
मैं ऑफिस के काम से चला गया और वो अपने मायके की तरफ।

अगली कहानी में आपको बताऊँगा कि कैसे मैंने जसप्रीत भाभी की पीछे से गांड मारी!

दोस्तो, तो कैसी लगी आपको भाभी के साथ मेरी यहचुदाई कहानी?
मुझे ईमेल करके ज़रूर बताएँ!
maannikhil288@gmail.com

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