• Home
  • Desi Kahani
  • प्यासी मकान मालकिन makan malkin ki chudai
प्यासी मकान मालकिन makan malkin ki chudai

प्यासी मकान मालकिन makan malkin ki chudai

हाय दोस्तो, मैं अभय मौर्या, जनपद गाजीपुर का मूल निवासी हूँ.
मेरी उम्र करीब 29 वर्ष है.
मैं औसत शरीर का, दिखने में स्मार्ट बंदा हूँ.
और मैं मिर्जापुर में सरकारी नौकरी करता हूँ.

मैं अन्य लोगों की तरह यह तो नहीं कहूँगा कि मेरा लंड 8 इंच या 10 इंच लम्बा है.
मेरा लंड सात इंच लम्बा और काफी मोटा है.

यह स्टोरी वर्ष 2015 की है

मेरा ट्रांसफर जनपद मिर्जापुर में हुआ.
मैं अपना सामान लेकर मिर्जापुर पहुंचा.
वहां एक दुकानदार से बातचीत करके किराए पर रूम के बारे में पूछा.
तो उसने एक नम्बर दिया.

मैंने कॉल किया तो एक सुन्दर सी मधुर आवाज़ आई.
मैंने किराए के बारे में पूछा तो उन्होंने बताया- मेरे यहां एक सिंगल रूम खाली है.

मैं उनसे पता पूछकर उनके बताए पते पर पहुंचा और घंटी बजाई.
कुछ पल बाद भाभी ‘आती हूँ’ कहती हुई बाहर आने की आवाज देने लगीं.

कुछ देर में एक गोरी सी, लम्बी और पतली सी भाभी ने दरवाज़ा खोला.
मैं उन्हें देखने लगा.

भाभी की उम्र करीब 32 वर्ष थी.

उन्होंने पूछा- जी कहिए?
मैंने बताया कि आपसे फोन पर बात हुई थी.
उन्होंने कहा- हां, चलिए … रूम दिखा देती हूँ!

वे मुड़ गईं और मुझे इशारा करती हुई आगे आगे चल दीं.
मैं उनके पीछे-पीछे उनके रूम में गया.

उन्होंने एक कमरे का दरवाज़ा खोला और रूम दिखाने लगीं.
मैं उनके उभारों को देख रहा था.
क्या मस्त गांड और बूब्स के उभार थे.

मैंने तुरन्त रूम के लिए हां कर दिया.
उन्होंने कहा- चलिए, बैठक में चलते हैं. आप पानी आदि भी पी लीजिए!

जब उन्होंने यह कहा कि आप पानी आदि भी पी लीजिए तो मैं उनका इशारा समझ गया कि उनके हुस्न को देख कर यदि मेरा गला सूख गया होगा, तो पानी से तर कर लीजिए.

मैं उनके साथ उनके ड्राइंग रूम में आ गया.
उन्होंने बैठने को कहा और किचन में चली गईं.

मैं उन्हें पीछे से देखता रहा.

एक मिनट बाद भाभी पानी लेकर आईं और मुझे गिलास थमा कर सामने बैठ गईं.

अब उन्होंने मेरा परिचय पूछा और मेरे परिवार के बारे में पूछा.
फिर उन्होंने पूछा- आपकी शादी नहीं हुई है क्या?

मैंने कहा- नहीं, अभी मेरी नौकरी लगी है और कोई अच्छी लड़की नहीं मिली, इसलिए शादी नहीं की.

फिर मैंने उनके बारे में पूछा तो उन्होंने अपना नाम मानसी बताया.
उन्होंने बताया कि मेरे पति ठेकेदारी का काम करते हैं और चुनार में पहाड़ पर हम लोगों का पट्टा है, जहां दिन भर उनके पति काम करवाते हैं.

मैंने उनसे उनके बच्चों के बारे में पूछा तो उन्होंने बताया कि मुझे अभी बच्चा नहीं चाहिए था, इसलिए अभी केवल ज़िन्दगी के मज़े ले रही हूँ.

मैंने उनसे उनके और परिजनों के बारे में पूछा तो उन्होंने बताया- हम लोग मूल रूप से चुनार के रहने वाले हैं. गांव में उनके सास-ससुर और उनके देवर रहते हैं.

मैंने उनसे कहा कि मुझे रूम पसन्द है, मैं शाम को शिफ्ट कर लूँगा.

फिर मैं आया और सामान के साथ शाम को पहुंचा.
भाभी घर पर अभी अकेली थीं, उनके पति अभी नहीं आए थे.

मैं अपना सामान सैट करने लगा.
सामान सैट करते-करते काफी देर हो गई.

तभी भाभी आईं और पूछने लगीं- आप खाना कहां खाएंगे?

मैंने कहा कि मैं टिफिन लगवा लूँगा.
इस पर उन्होंने कहा- आज देर हो गई है, आज आप हमारे यहां खाना खा लीजिएगा, कल से टिफिन लगवा लीजिए.

मैंने उन्हें थैंक्यू कहा.
भाभी चली गईं.

देर शाम को उनके पति आए तो वे मेरे कमरे में आए.
उनसे मेरा परिचय हुआ.

उनका नाम राजेश था.
उनकी उम्र करीब 40 वर्ष थी.

लेकिन वे सी भी स्तर से इतनी खूबसूरत बीवी के पति नहीं लग रहे थे.
उनका पेट काफी निकला हुआ था और सिर पर आधे से ज्यादा बाल गायब थे.
केवल किनारे-किनारे बाल थे.

थोड़ी देर बातचीत व परिचय के बाद उन्होंने कहा- चलो अभय, खाना खा लेते हैं!
मैं उनके साथ नीचे आया.

थोड़ी देर बाद भाभी खाना लेकर आईं.
मानसी भाभी खाना देने के लिए झुकीं, तो गहरे गले के सूट होने के कारण उनकी चूचियां साफ़ दिखाई दे रही थीं.
बस मेरे लंड ने हरकत शुरू कर दी.

उस वक्त मेरा मन यही कर रहा था कि उनकी चूचियों का सारा दूध अभी चूस लूँ.
जैसे-तैसे मैंने खाना खाया और अपने कमरे में आकर लेट गया.

अभी भी मेरे दिमाग में मानसी भाभी की चूचियां घूम रही थीं.
मैं अपना लंड निकाल कर मुठ मारने लगा.
वीर्य गिरने के बाद मैं शांत हुआ, फिर सो गया.

सुबह जागकर तैयार हुआ और अपने ऑफिस चला गया.
अब यही रोज़ की दिनचर्या बन गई थी.

लगभग 10 दिनों के बाद की बात है.
उस दिन जब मैं ऑफिस में था तो मेरा सिर दर्द करने लगा.

मैंने ऑफिस से छुट्टी लेकर सोचा कि चलकर रूम पर आराम करूँगा.

जब मैं रूम पर आया तो मेन गेट खुला था.
मैं अन्दर अपने रूम में चला गया.

मुझे प्यास लगी.
पानी पीने के लिए उठा तो देखा कि मेरा पानी खत्म हो गया था.
मैंने सोचा कि चलकर मानसी भाभी से थोड़ा पानी मांग लेता हूँ.

मैं बोतल लेकर मानसी भाभी को आवाज़ लगाते हुए उनके कमरे के पास पहुंचा.
कई बार आवाज़ लगाने के बाद भी मानसी भाभी ने जवाब नहीं दिया तो मैंने उनके बेडरूम के दरवाज़े को थोड़ा सा धक्का दिया.

दरवाज़ा खुला था तो पूरा दरवाज़ा खुल गया.
अन्दर का नज़ारा देखकर मेरी आंखें फटी की फटी रह गईं.

मानसी भाभी एकदम नंगी अपने बिस्तर पर थीं, उनके एक हाथ में मोबाइल था, जिसका इयरफ़ोन उनके कानों में लगा था और दूसरे हाथ में वे एक मोटा डिल्डो अपनी चूत में डालकर उसे अन्दर बाहर करने में लगी हुई थीं.

उस वक्त उनका सिर मेरी तरफ था तो मोबाइल की स्क्रीन साफ दिखाई दे रही थी.

मोबाइल में एक लड़की डिल्डो से अपनी चूत की चुदाई कर रही थी.

दरवाज़ा खोलते ही मानसी भाभी का ध्यान दरवाज़े की तरफ़ आया.

उन्होंने मुझे खड़ा देखा तो तुरंत मोबाइल रखकर अपनी चूत में से डिल्डो निकाल कर पास में रखी चादर से खुद को ढक लिया.

मैं पत्थर सा बना इस सोच में खड़ा था कि अब क्या करूँ.
तभी मानसी भाभी ने बोला- क्या हुआ? तुम बाहर चलो, मैं आती हूँ!

उसके बाद मैं बाहर जाकर सोफ़े पर बैठ गया.

थोड़ी देर बाद मानसी भाभी बाहर आईं.
उन्होंने एक नाइटी पहनी थी.
शर्म के मारे उनकी नज़र नीचे थी.

उन्होंने कहा- तुम्हें दरवाज़ा खटखटाकर या आवाज़ देकर बुलाना चाहिए था … तुम ऐसे अन्दर क्यों आ गए?

इस पर मैंने बोला- भाभी, मैंने कई बार आपको आवाज़ लगाई, आपने नहीं सुना तभी मैं अन्दर आ गया.
वे चुप रहीं.

मैं समझ गया कि वे चुदासी हैं और शायद इन्हें कुछ खोल दिया जाए तो काम बन सकता है.

एक पल सोचने के बाद मैंने निर्णय ले लिया कि अब साफ साफ ही बात कर लेता हूँ, जो होना होगा सो हो जाएगा.

मैंने उनसे पूछा- भाभी, राजेश भैया आपकी अच्छे से चुदाई नहीं कर पाते हैं क्या, जो आप डिल्डो से अपनी चूत की चुदाई कर रही थीं?

यह सुनकर भाभी ने मुझे देखा और शायद उनके लिए मैं एक संभावना बन गया था.
तो वे मुझे निहारने लगीं.

एक दो पल बाद भाभी उदास स्वर में बोली- तुम्हारे भैया अक्सर लेट आते हैं और काम से थक-हारकर आते हैं तो वे आते ही खाना आदि खाकर सीधे सो जाते हैं.

मैंने उन्हें सवालिया नजरों से देखते हुए मुँह से सिर्फ इतना कहा- और सेक्स?
‘वे महीने में दो-तीन बार से ज़्यादा सेक्स नहीं कर पाते हैं!’

अब मैं उन्हें प्यासी निगाहों से देखने लगा था तो वे कुछ और ज्यादा खुलने लगीं.

‘यदि मेरे पति मेरे साथ सेक्स करते भी हैं तो चार-पांच मिनट में अपना काम तमाम कर सो जाते हैं. मैं तड़पती रह जाती हूँ, इसलिए मैंने ऑनलाइन यह डिल्डो मंगवाया है. मेरे बच्चे न होने का कारण यह भी है … वे मेरी चूत की चुदाई ठीक से नहीं कर पाते हैं!’ इतना साफ साफ कहकर भाभी रोने लगीं.

त्रिया चरित्र के बारे में मैंने सुना तो था, पर आज देखने का अवसर भी मिल गया था.

मैंने मौका देखा और उन्हें चुप करवाने के लिए सहारा दिया.
जैसे ही मैंने उन्हें अपने हाथ से छुआ, उन्होंने मुझे कसकर गले लगाते हुए अपनी छाती से चिपका लिया.

मैंने भी उन्हें अपनी बांहों में भर कर कहा- भाभी, यदि बुरा न मानें तो मैं एक बात कहूँ?
तो उन्होंने गर्म सांसें छोड़ते हुए कहा- हां, बताओ!

मैंने मानसी भाभी से कहा कि भाभी, आप यदि बुरा न मानें तो मैं आपको इस डिल्डो से ज़्यादा मज़ा दे दूँगा.
भाभी ने कहा- यदि राजेश को पता चल गया तो बहुत बुरा होगा, वे मेरी जान ले लेंगे!

मैंने कहा- आप मत बताना और मैं भी नहीं बताऊंगा तो उन्हें कैसे पता चलेगा?

इस बात पर भाभी कुछ नहीं बोलीं, तो मैं उनकी मौन स्वीकृति मानते हुए उनकी पीठ पर हाथ फेरने लगा और उनके चूतड़ों को दबाने लगा.

मेरा लंड अकड़ कर खड़ा हो गया था और भाभी की चूत के पास चुभ रहा था.
इसका अंदाज़ा भाभी को हो गया था. उन्होंने तुरंत मुझे किस करना शुरू कर दिया.

मैं भी उन्हें चूमने लगा.
लगभग 5 मिनट किस करने के बाद उन्होंने कहा- चलो, बेडरूम में चलते हैं!

मैंने उन्हें तुरंत सोफ़े पर धकेला और उनकी नाइटी उतार दी.
कसम से … भाभी क्या कांटा माल लग रही थीं.
वे नाइटी के नीचे कुछ भी नहीं पहनी थीं.

मैंने कहा- भाभी, आप तो काम की देवी लग रही हो!
इस पर उन्होंने कहा- मुझे भाभी मत कहो, मुझे मानसी कहो.

मैंने तुरंत उन्हें गोद में उठाया और कमरे में ले जाकर बेड पर लिटा दिया.

मानसी भाभी की नंगी चूत मेरे सामने थी.
उनकी सफाचट चूत रो रही थी.

मैंने भाभी की चूत पर अपना मुँह लगाया और चूत चाटने लगा.
मानसी भाभी मेरा सिर अपनी चूत पर दबाने लगीं.

मैं चुत में जीभ अन्दर कर भाभी की चूत को बड़ी बेताबी से चाटने लगा.
मानसी भाभी कुछ ही पलों में आह … आह … करने लगीं और थोड़ी देर बाद अकड़ कर झड़ गईं.

मैंने मानसी भाभी की चूत चाटकर साफ़ कर दी.

भाभी कहने लगीं- मुझे आज तक इतना मज़ा नहीं आया था!
मैंने कहा- अभी तो शुरुआत है मेरी जान, अभी तो तुमने मेरा लंड भी नहीं देखा.

इतना कहकर मैं मानसी भाभी को किस करने लगा और उनकी चूचियों से खेलने लगा.
भाभी थोड़ी ही देर में फिर से गर्म होने लगीं.

उन्होंने मेरे कपड़े उतारे और मेरा लंड देखकर बोलीं- तुम्हारा लंड मेरे पति से काफी मोटा और लम्बा है … आज मेरी चूत फाड़ दो … आज मुझे ऐसा चोदो कि मैं स्वर्ग का अनुभव कर लूँ!

मैं मानसी भाभी की दोनों चूचियों को बारी बारी से चूसते हुए एक हाथ से दबाता रहा.

मानसी भाभी मेरे लंड से ऐसे खेल रही थीं, जैसे उसने पहली बार लंड देखा हो.
मैंने वासना से भाभी का दूध दबाते हुए उन्हें इशारा किया कि लंड चूसो!

यह देखते ही मानसी भाभी ने लंड को मुँह में लेकर चूसना शुरू कर दिया.

वे बहुत मज़े से लंड चूस रही थीं.
मैं सातवें आसमान पर पहुंच गया.

वे मुझे देख कर बोलीं- एक साथ करें!
मैं तुरंत 69 की पोजीशन में आ गया.

अब मैं मानसी भाभी की चूत चाट रहा था और वे मेरा लंड चूस रही थीं.

कुछ देर बाद भाभी ने कहा- जल्दी से अपना लंड मेरी चूत में डाल दो!

मैंने भी देर न करते हुए तुरंत पोज सैट किया और भाभी की चूत पर अपना लंड लगा दिया.
वे अभी कुछ समझ पातीं कि मैंने एक तगड़ा धक्का लगा दिया.

मेरा आधा लंड मानसी भाभी की चूत में घुसता चला गया.

थोड़ी देर पहले चूत में डिल्डो लेने व झड़ने के कारण मानसी भाभी की चूत काफी गीली व चुदासी थी, जिससे भाभी ने आराम से मेरा पूरा लंड अन्दर ले लिया.

मानसी भाभी की चूत में मेरा लंड टाइट जा रहा था, जिससे वे आह आह कर रही थीं.
मैंने धक्का लगाना शुरू किया तो भाभी ने कहा- पहले धीरे-धीरे धक्का लगाओ … फिर गाड़ी भगाना!

मैं अनुभवी भाभी के साथ चुदाई के स्टेप सीखने लगा.

कुछ देर लंड से चुत को रसीला करते हुए धीरे-धीरे चुदाई के बाद मैंने ज़ोर-ज़ोर से धक्का लगाना शुरू कर दिया.

अब भाभी भी नीचे से गांड उठाती हुई लंड से लोहा लेने लगी थीं.
करीब 10 मिनट तक मैंने उनकी चूत की चुदाई की.
हॉर्नी भाभी फक के दौरान वे एक बार पुनः झड़ गईं.

मैं लगा रहा.
कुछ देर बाद भाभी वापस चार्ज हो गईं और उन्होंने कहा- अभय अब तुम लेट जाओ, मैं तुम्हारे ऊपर आती हूँ!
मैं चुत से लंड खींच कर चित लेट गया.

भाभी ने पहले मेरे लंड को मुँह में लिया और मस्ती से चूसकर उसे गीला किया.

उसके बाद वे अपनी चूत लंड पर सैट करके बैठ गईं और मज़े से कूदने लगीं.

लगभग आधा घंटा तक अलग-अलग चुदाई के बाद मेरा माल निकलने को हुआ तो मैंने मानसी भाभी से कहा- जान, मेरा माल निकलने वाला है!

मानसी भाभी ने तुरंत चुत को लौड़े से खींचा और उकड़ूँ बैठकर मुँह खोल दिया.

मैंने सारा माल मानसी भाभी के मुँह में गिरा दिया.
भाभी ने बड़े मजे से रस चाट लिया और अच्छे से लंड चाटकर साफ़ कर दिया.

उसके बाद हम दोनों लेट गए.
भाभी काफी देर तक मुझे अपने साथ चिपका कर सोई रहीं.

बाद में मानसी भाभी ने बताया कि मुझे आज तक चूत की चुदाई का ऐसा सुख कभी नहीं मिला था, जैसा आज तुमने दिया है.

उसके बाद शाम तक हम दोनों ने चार बार चुदाई की.
फिर उनके पति के आने का टाइम हो गया तो मैं अपने कमरे में चला गया.

इस तरह से मेरी और मानसी भाभी की चुदाई की शुरुआत हुई.

इस घटना के बाद मैं शाम को रोज़ 5:00 बजे ऑफिस से आता तो सीधा मानसी भाभी के पास चला जाता और रोजाना भाभी की चुदाई करने लगा.

भाभी पहले से काफी खुश रहने लगी थीं.

एक दिन मैंने भाभी से उनकी गांड मारने को कहा तो उन्होंने कहा कि किसी खास मौके पर यह तोहफा मिलेगा.

बाद में मुझे और मानसी भाभी को चुदाई करते हुए राजेश भैया ने देख लिया.
पहले तो वे बहुत नाराज़ हुए, बाद में वे अपनी कमज़ोरी जानकर चुप हो गए.

फिर वे भी हमारे साथ शामिल हो गए.
हम लोग कई बार थ्रीसम सेक्स भी किया.

उसकी कहानी फिर कभी लिखूँगा.

मानसी भाभी मेरे बच्चे की मां बनी.
प्रेग्नेंसी के दौरान जब मैं भाभी की चुदाई नहीं कर पा रहा था, तब मैंने भाभी से कहकर उनकी दो सहेली की चूत भी चोदी थी.

वह सेक्स कहानी भी आपको आगे कभी जरूर सुनाऊंगा.

मैं आज भी मिर्जापुर में हूँ और आज भी मानसी भाभी की चुदाई करता हूँ.
यह बात आज तक राजेश भैया के अलावा किसी को नहीं पता है.

मैं आप लोगों को मानसी भाभी की गांड चुदाई की कहानी को फिर कभी बताऊंगा कि मैंने कैसे भाभी की गांड मारी.

दोस्तों, यह मेरी पहली सेक्स कहानी है. उम्मीद करता हूँ आपको पसन्द आई होगी.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Scroll to Top
Baltimore ravens nfl championship wrestling belt. The inverted 69 woman lifts man standing sex position – muscle girl directory. Casino, pemain dapat merasakan sensasi berjudi yang nyata tanpa harus meninggalkan rumah mereka.