चुद गई प्यासी आंटी

चुद गई प्यासी आंटी

चुद गई प्यासी आंटी सेक्स स्टोरी में बहुत बहुत स्वागत है21 साल का राजू, अपने कमरे में बंद होकर साउंड म्यूट करके पोर्न फिल्म देख रहा था।

रात के 11 बजे थे, तभी बाहर से उसकी माँ की आवाज आई – “राजू बेटा, शांता आंटी के घर जाओ, आज वो ही रुक रही हैं। उनके घर में कोई नहीं है।”

49 साल की शांता आंटी राजू की पड़ोसन थीं, सुंदर गोरी और थोड़ी मोटी, और राजू की माँ की अच्छी दोस्त थीं। उनका पति रेलवे में काम करता था जो अक्सर रात को ड्यूटी पर रहता था, बेटा अमर जिससे राजू कभी नहीं मिला। पोर्न फिल्म के बीच इस इंटरप्शन से राजू को कोई मजा नहीं आया और माँ की बात मानकर वह पड़ोस के घर पहुँच गया।

शांता आंटी टीवी देख रही थी – “अच्छा हुआ बेटा, आ गया। अमर भी अपने कॉलेज के दोस्तों के साथ आउटिंग पर गया है, मुझे अकेला रहना डरावना लगता है इसलिए मैंने तुझे बुलाया। क्या तुम कुछ खाओगे बेटा?”

राजू पोर्न फिल्म न देख पाने की वजह से अभी भी गुस्सा था – “नहीं आंटी, मैं खा चुका हूँ।”

राजू आराम से सोफे पर बैठकर टीवी देखने लगा। शांता आंटी – “अच्छा, सुनो, क्या मैं बुढ़िया हो गई हूँ?”

राजू – “नहीं तो…किसने कहा? आप मेरी माँ से बहुत जवान दिखती हैं।”

शांता आंटी – “पता है, आज बाजार में एक बदमाश लड़का अपने दोस्त से कह रहा था…देखो देखो मोटी आंटी कैसे कमर मटका मटका चल रही है…(उदासीन होकर) और दोनों हंसने लगे।”

राजू – “अरे वो बेवकूफ लड़के हैं, उनकी बातों पर ध्यान क्यों देना आंटी?”

शांता आंटी – “तुम सही कह रहे हो (शांता आंटी खड़ी हो जाती है और राजू की पीठ से टकराती है और फिर मुड़कर उसे देखते हुए कहती है) सच में बोला…क्या मैं पीछे से बहुत मोटी दिखती हूँ?”

राजू पहली बार शांता आंटी की भारी-भारी चूतड़ों को इतनी ध्यान से देख रहा था, वो अभी अभी पोर्न फिल्म के कुछ दृश्यों को देखकर आया था…वो उस दृश्य को याद आता है जिसमें एक काला आदमी और एक महिला की नंगी पीठ पर मुंह लगाकर खाना खा रहा होता है। वह उत्साहित हो जाता है।

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राजू – “आंटी आप ज़रूर पीछे से बहुत अच्छी लगती हैं।”

शांता आंटी – “बस बस, बकवास मत करो, मुझे झूठ नहीं सुनना (वह अपने दोनों हाथों को पीछे करके अपनी गांड पर रखती है और हल्के-हल्के थपथपाने लगती है जिससे उसकी मुलायम मोटी गांड साड़ी में घुमावदार हो जाती हैं) ये बता कि क्या यह बहुत बड़ी दिखती है?”

राजू यह देखकर और उत्साहित हो जाता है – “अरे नहीं नहीं आंटी, मैं सच बोल रहा हूँ…मेरी बात पर विश्वास करो प्लीज। यह बहुत सही आकार और शेप की है। ऐसी आकार और शेप वाली महिलाएं किस्मत वालों को ही मिलती हैं या फिर वो रोज जिम जाती हैं।”

शांता आंटी – “तुम सच बोल रहे हो ना???? वैसे भी ये सिर्फ 40 साइज की है। नहीं पता आजकल के लड़कों में क्या हो गया है। महिलाओं का सम्मान करना तक भूल गए हैं। कैसी-कैसी गंदी बातें करते हैं।”

राजू – “अरे आंटी, आप उन बदमाशों की बातों पर क्यों इतना दिल रखती हैं? वो तो कुछ भी बोलते रहते हैं।”

शांता आंटी फिर से सोफे पर बैठ जाती है – “फिर भी कोई शिष्टाचार होना चाहिए। मैं उनकी उम्र की हूँ। ऐसा बोलाना चाहिए ना? नहीं पता आजकल के लड़कों में क्या हो गया है…बहुत गंदी-गंदी बातें करते हैं।”

राजू सुनकर और उत्साहित हो जाता है – “क्यों क्या हुआ आंटी?”

शांता आंटी – “वो दिन मैं साड़ी ख़रीदने गई थी, साड़ी ऊपर से कंधे पर रखकर दर्पण देख रही थी, दुकान के बाहर कुछ लड़के खड़े थे और ध्यान से देख रहे थे। तभी एक ने कहा – यार, क्या मस्त आंटी है, ये बिना साड़ी के तो और भी मस्त लगेंगी।”

राजू – “हा हा हा हा…….”

शांता आंटी – “अरे बदमाश…तुम क्यों हंस रहे हो अब?”

राजू – “हा हा हा…अरे आंटी यह तो फ्लैटरी थी। आपको बुरा लगा तो अच्छा नहीं लगता, अच्छा बोले तो अच्छा नहीं लगता।”

शांता आंटी – “अरे ऐसा नहीं है राजू, बोल अगर तारीफ करनी है तो उसका एक तरीका होता है…ऐसा थोड़ा ज़हिल की तरह कुछ भी कह दो (थोड़ा रुककर) अच्छा तुम बहुत शरारती हो, तुम मेरी बहुत इज्जत करते हो…अगर तुम्हें मेरी तारीफ करनी होती तो तुम कैसे बोलते?”

राजू थोड़ा सोचकर – “वाह कितनी सुंदर आंटी हैं यार। एक बार इनकी फिगर को देख लो तो बार बार देखने का मन करेगा।”

शांता आंटी – “अरे वाह राजू…यह होता है किसी औरत की तारीफ करने का तरीका। ओह देखते-देखते काफी देर हो गई है, अब सो जाओ…बिस्तर पर चले आओ हम वहाँ बातें करते हैं।”

राजू शांता आंटी के पीछे पीछे बेडरूम जाता है, शांता आंटी अपनी साड़ी उतारने लगती है।

शांता आंटी – “राजू लाइट ऑफ कर दे।”

राजू लाइट बंद कर देता है, शांता आंटी ब्लाउज और पेटिकोट में बिस्तर पर लेट जाती है।

शांता आंटी – “राजू बेड पर बैठ जा थोड़ा और ये लो क्रीम, इसको मेरे पैरों में लगा दे, अमर रोज़ रात को लगाता था तब मुझे नींद आती थी। तुम्हें बुरा तो नहीं लगेगा ना राजू?”

राजू अंधेरे में अनजान तरीके से क्रीम का ट्यूब शांता आंटी के हाथों से लेता है – “अरे नहीं आंटी, कैसी बात कर रही हो। आपकी सेवा करने में मुझे क्या बुरा लगेगा भला?”

राजू शांता आंटी के पैरों में धीरे-धीरे क्रीम लगाने लगता है। शांता आंटी – “तुम बहुत अच्छा लड़का हो, बहुत शरारती और सच्चा…तुम्हें महिलाओं का सम्मान करना भी आता है। पर बदमाश लड़कों की वजह से घर से बाहर निकलना मुश्किल हो गया है मेरे लिए, अगर सब तुम्हारे जैसे होते तो…”

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राजू के हाथ अब पेटिकोट के नीचे से घुटनों तक पहुँच गए थे, वह दोनों हाथों से दोनों घुटनों पर क्रीम लगा रहा था – “क्या हुआ आंटी?”

शांता आंटी – “उम्र का कोई शिष्टाचार ही नहीं है, महिलाओं का सम्मान करना भूल गए हैं, वो दिन मैं बाजार गई थी तो वहाँ के बदमाश लड़के मुझसे गंदी-गंदी बातें करने लगे…एक ने तो यहाँ तक कह दिया कि दिल कर रहा है अब इसको पकड़ लूं और साड़ी उठाकर खड़े-खड़े ही…”राजू उत्साहित हो गया और दोनों हाथों को पेटिकोट के अंदर ले जाकर शांता आंटी की गोरी मलाईदार मुलायम मांसल जांघो को सहलाने लगा – “ओह मेरे गॉड…क्या वो आपकी साड़ी उठाकर खड़े-खड़े आपको चोदना चाहते थे?”

शांता आंटी – “राजू थोड़ा पेट में भी क्रीम लगा दो।”

राजू शांता आंटी की गोरी मलाईदार पेट में धीरे-धीरे क्रीम लगाने लगा। शांता आंटी ने जैसे ही बात को ताल और हाथों को जांघो पर ले जाने देखा तो उसने राजू को पेट में क्रीम लगाने को कहा, इस बात से राजू शांत हो गया और चुपचाप पेट में क्रीम लगाने लगा।

शांता आंटी – “पता है, दूसरा तो वो भी बहुत बदमाश था….वो कह रहा था कि ये ऐसी मस्त माल के साथ जल्दबाजी नहीं करनी चाहिए…मुझे मिल जाए तो मैं उसे लिटाकर उसकी खूब जी भर कर चोदूंगा।”

यह सुनकर राजू रिलैक्स हो गया और उत्साहित भी। वह धीरे-धीरे आंटी की बूब्स को दबाने लगा – “तो वो आपकी बूब्स की तारीफ ही तो कर रहे थे ना आंटी?”

शांता आंटी – “ऐसा थोड़ी तारीफ करते हैं, तमिज भी होनी चाहिए। तो बहुत जेंटलमेन है…तुम बताओ अगर उनका स्थान तुम होते तो तुम क्या बोलते?”

राजू अब खुले में बूब्स को दबाने लगा, मसलने लगा, निप्पल्स को उंगलियों के बीच ले कर मसलने लगा – “हम्म…कितनी मस्त और सेक्सी बूब्स हैं आंटी जी की, एक बार छूने को मिल जाए तो जिंदगी बन जाएगी, एक बार चूमने को मिल जाए तो जन्नत मिल जाएगी, एक बार चूसने को मिल जाए तो पूरी कायनात मिल जाएगी।”

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शांता आंटी – “आह्ह्ह्ह्ह…इसस….यह हुआ है तरीका…कash इतनी तमिज सबको होती। पर वो लोग तो जाहिल थे, एक ने तो यहाँ तक कहा कि मैं इस मस्त आंटी के टांगो के बीच बैठ जाऊंगा और ऐसे चाटूँगा की इनकी बूब्स जोर-जोर से ऊपर नीचे हो जाएँगी मेरे लिंग के दबाव से। ऐसी मस्त बूब्स को तो चोद चोद कर हिलाने में बहुत मज़ा आएगा,”

राजू अब बहुत ज्यादा उत्साहित हो गया था..वह ज़ोर से आंटी की बूब्स को मसलने लगा – “तो वो सब आपको चोदना चाहते थे?”

शांता आंटी करवट बदलकर उल्टे लेट जाती है…”थोड़ा कमर भी दबा दे राजू”

राजू कमर दबाने लगता है।

शांता आंटी – “अरे वो कुत्तों का बस चलता तो वो सब मुझे पकड़ कर एक साथ ही चोद डालते।”

राजू आंटी की मुंह से ऐसी बातें सुनकर पागल हो रहा था, वह नियंत्रण नहीं कर पाया और पीछे से पेटिकोट के नीचे हाथ डाल दिया और जांघो को सहलाने लगा।

शांता आंटी – “ऐसा मस्त गांड मैं अपनी जिंदगी में कभी नहीं देखी”

राजू अपने हाथों को ऊपर ले जाता है और दोनों हाथों को आंटी की नंगी चूतड़ो पर रख देता है। आंटी ने पैंटी भी नहीं पहनी थी – “बात तो वो सही कह रहे थे”

शांता आंटी – “अरे तुमको पता है, एक बार तो मैं बस में गई थी, बस में बहुत भिड़भाड़ थी (राजू अपने हाथ फिर से गांड में डालता है) उुफ़्फ्फ़्फ़….एक तुम्हारी ही उम्र का लड़का था…मेरे पीछे खड़ा हो गया (राजू ने फिर से हाथ को अंदर-बाहर किया) इसस…वो मेरे पीछे खड़ा होकर बहुत देर तक मेरी गांड में अपनी उंगली करता रहा (राजू ने फिर से हाथ को अंदर-बाहर किया) ओई मम्मा….”

शांता आंटी पलट कर सीधा लेट गई। राजू – “ओह तो आपने उसको डांटा?”

शांता आंटी – “अरे मैं क्या बोलती? कुछ बोलती तो अगर वो ये कह देता कि इतनी जवान लड़कियों के होने के बाद भी इस बुढ़िया के साथ ऐसा क्यों कर रहा हूँ। तो सब लोग सोचेंगे कि मैं ही खराब हूँ”

राजू अंधेरे का फायदा उठाकर अपना पैंट उतार देता है और शांता आंटी के जांघो के बीच बैठ जाता है – “अरे आंटी, ऐसा कोई नहीं बोलता। वैसे भी आप लड़की से ज्यादा सेक्सी लगती हैं। आप जानते हैं अगर किसी लड़की को नंगा कर के एक तरफ रखो और दूसरी तरफ आपको नंगा कर के रखो…और 1000 लोगों से पूछो कि किसको चोदना चाहते हैं…तो सब आपकी ही चूत चुभने चाहेंगे।”

राजू अपने हाथ को आंटी की नंगी हल्के-हल्के बालों वाली चूत में रखकर सहलाने लगता है।

शांता आंटी – “अरे तुमको पता है, एक बार तो मैं होली पर अपने दोस्त के घर गई थी। उनके यहाँ 4 लड़के रहते थे। उन्होंने मुझे अपने कमरे में बुलाया और मेरे साथ होली खेलने के बहाने पूरे शरीर को सहला दिया…एक ने तो मुझे गिराकर मेरे ऊपर ही चढ़ गया….”

राजू रुक नहीं पाया। वह आंटी पर चढ़ गया और एक हाथ से अपना मोटा भारी भरकम लिंग पकड़ कर शांता आंटी की चूत के मुँह में डालने लगा – “फिर क्या हुआ आंटी?”

शांता आंटी – “फिर…फिर…वो…वो…उसने मेरे बूब्स को खूब दबाया और…(राजू अपना लिंग 4 इंच अंदर घुसा देता है एक जोरदार धक्का मारकर) ओई माँ…मार गई….”

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